रामायण के अमर पात्रो Story in Hindi with moral for class 9

 1.शबरी और राम की कहानी रामायण के अमर पात्रो

( Story in Hindi with moral for class 7,  8 , 9 , 10 )

रामायण के अमर पात्रो Story in Hindi with moral for class 9
रामायण के अमर पात्रो Story in Hindi with moral for class 9

Story in Hindi with moral for class 9 एक था वन । उसमें एक नदी बहती थी । नदी के किनारे एक झोंपड़ी थी । उसमें एक भीलनी रहती थी । उसका नाम था शबरी । उम्र काफी हो चुकी थी पर जरा भी आलस्य नहीं था ।

सवेरे जल्दी उठती थी झोंपड़ी – आँगन की अच्छी तरह सफाई करती । इसके बाद नदी में नहाने जाती । फिर पूजा , भजन तथा राम नाम का जप करती ।दुबला – पतला शरीर । गले में रुद्राक्ष की माला । शरीर पर एकाध वस्त्र लपेटे हुए ऋषि – पत्नियों की भाँति सिर पर ऊँचा – सा जूड़ा ।

चेहरे पर झुर्रियाँ । नोकदार नाक और आगे की ओर निकली हुई ठोड़ी । छोटी – छोटी आँखें , आँखों में राम की प्रतीक्षा और पोपले मुँह में राम का नाम ।शबरी वर्षों से राम की प्रतीक्षा करती थी । तभी उसे समाचार मिले , राम सीता को खोजने निकले हैं तथा इसी ओर आ रहे हैं ।

बस , फिर तो पूछना ही क्या ? शबरी की खुशी उसके हृदय में समा नहीं रही थी । राम के स्वागत के लिए वह क्या करे , क्या न करे ? उसे कुछ सूझ नहीं रहा था । तभी शबरी की नजर पड़ी सामने वाले बेर के पेड़ पर ।

उसकी डालियों पर सुंदर – सुंदर बेर लगे थे । शबरी तो हाथ में टोकरी ले कर चल पड़ी बेर के पेड़ की ओर और टपाटप बेर तोड़ने लगी । बेर तोड़ते समय उँगलियों में काँटे चुभते थे , उँगलियाँ छिल रही थीं ।

पर शबरी को इसका खयाल कहाँ था ?? फिर तो शबरी एक – एक बेर चखने लगी । मीठे – मीठे बेर रखने लगी । खट्टे – खट्टे बेर फेंकने लगी । कच्चे बेर फेंक दिए ।

पक्के बेर टोकरी में रख लिये । और इसके बाद शबरी झोपड़ी के दरवाजे में खड़ी हो गईतभी दूर से कोई दो व्यक्ति आते हुए दिखाई दिए ।

शबरी ने सोचा , ये दो व्यक्ति राम और लक्ष्मण ही होंगे । तभी राम और लक्ष्मण आ पहुंचे । उन्हें देख कर शबरी पुलकित हो उठी । पहले तो शबरी ने राम की आरती उतारी फिर उन्हें बैठने के लिए आसन दिया ।

बड़े – बड़े लंबे पत्तों में शबरी ने जूठे बेर रखे और भावविभोर हो गई ।राम तो प्रेम के भूखे थे , भावना के भूखे थे । राम के मन में न कोई ऊँच था , न कोई नीच । राम तो एक के बाद एक बेर खा रहे थे ।

शबरी के आनंद की सीमा न थी … उसकी आँखों से बेर जैसे बड़े – बड़े खुशी के आँसू टपकने लगे । शबरी का यह प्रेम पा कर राम भी धन्य हो गए । सीता के न मिलने का दुःख भी राम कुछ देर के लिए भूल गए । थोड़ी देर के बाद शबरी से विदा हो कर राम और लक्ष्मण फिर सीता की खोज में निकल पड़े …

 

2. वालि और राम की कहानी रामायण के अमर पात्रो

( Story in Hindi with moral for class 7,  8 , 9 , 10)

 

एक नगरी थी । उसका नाम था किष्किंधा । कितना सुंदर नाम ! तबले को जरा – सा बजा कर बाद में जैसे उस पर थाप दी हो ! किष् … किन् … धा ! इस नगरी के राजा का नाम वालि था । वालि के छोटे भाई का नाम सुग्रीव था ।

दोनों भाइयों को एक – दूसरे से बहुत प्रेम था । वालि का शरीर पहाड़ जैसा मजबूत था । वालि को कोई परास्त नहीं कर सकता था । वालि का एक मुक्का पड़ने पर बड़े – बड़ों का काम तमाम हो जाए ।

वालि को कोई युद्ध के लिए ललकारता तो वालि तुरंत युद्ध के लिए तैयार हो जाता ।एक बार .. एक मायावी राक्षस ने वालि को चुनौती दी : ‘ हे वालि … बाहर आ … मुझसे युद्ध कर ।

‘ वालि तो ऐसे अवसर की प्रतीक्षा ही करता रहता था । वालि तुरंत बाहर आया । उसे देखते ही राक्षस भागा । वालि के पीछे – पीछे सुग्रीव भी आ गया ।

राक्षस और तेजी से भागा । वालि ने उसका पीछा किया । वालि के पीछे – पीछे सुग्रीव था । डर के मारे राक्षस भा … गता हुआ एक गुफा में घुस गया ।एक बार .. एक मायावी राक्षस ने वालि को चुनौती दी : ‘ हे वालि … बाहर आ … मुझसे युद्ध कर ।

वालि तो ऐसे अवसर की प्रतीक्षा ही करता रहता था । वालि तुरंत बाहर आया । उसे देखते ही राक्षस भागा । वालि के पीछे – पीछे सुग्रीव भी आ गया ।

राक्षस और तेजी से भागा । वालि ने उसका पीछा किया । वालि के पीछे – पीछे सुग्रीव था । डर के मारे राक्षस भा … गता हुआ एक गुफा में घुस गया ।तभी सुग्रीव के पाँवों से किसी गर्म – गर्म तरल पदार्थ का स्पर्श छुआ ।

सुग्रीव ने देखा तो खून था ! में से बह कर आ रहा था ! सुग्रीव ने जोर – जोर से पुकारा : ‘ वालि … वालि … ‘ प्रतिध्वनि सुनाई दी : ‘ वालि … वालि …. लेकिन गुफा से वालि की आवाज नहीं आई । गुफा गुफा में से खून निकल रहा … सुग्रीव ने सोचा लगता है राक्षस ने वालि को मार डाला है ।

अब राक्षस बाहर आएगा तो मुझे भी मार डालेगा । इसके पहले ही मैं एक बड़ी शिला से गुफा का द्वार बंद कर दूं इससे राक्षस गुफा के अंदर ही भूखा – प्यासा मर जाएगा । गुफा का द्वार बंद करके सुग्रीव राजधानी में लौट आया । उसने वालि की मृत्यु की घोषणा की । इसके बाद सुग्रीव शांतिपूर्वक राज्य करने लगा ।

इसी बीच एक दिन वालि आग बबूला हो कर तूफान की तरह आ पहुँचा ।। वालि ने मान लिया था कि सुग्रीव ने राज्य हथियाने के लिए उसके साथ धोखा किया और उसे गुफा में बंद कर राज्य करने लगा ।

क्रोध से तमतमाए हुए वालि ने आते ही सुग्रीव की खूब मरम्मत की । कैसा भी हो , सुग्रीव उसका भाई था इसलिए उसने सुग्रीव को मृत्युदंड नहीं दिया , पर उसे राज्य से निकाल दिया ।

इसलिए सुग्रीव को राज्य और पत्नी को छोड़ना पड़ा । तब से सुग्रीव ऋष्यमूक पर्वत पर रहता था ।रावण सीताजी को उठा ले गया , तब से राम – लक्ष्मण सीता की खोज में वन – वन भटक रहे थे ।

राम – लक्ष्मण को संकेत मिला था ‘ सीता तुम्हें जरूर मिलेगी । इसके लिए वानर सुग्रीव की सहायता लो । ‘ राम – लक्ष्मण पंपा सरोवर आए । सुग्रीव से मिले ।

राम और सुग्रीव दोनों ने एक दूसरे से अपने – अपने दु : ख कहे । सुग्रीव ने राम को आश्वासन दिया : ‘ चाहे जैसे भी हो , मैं सीताजी को खोज निकालूंगा । ‘ .. राम ने सुग्रीव को वचन दिया : ‘ चाहे जैसे भी हो , मैं वालि का वध करूँगा और तुम्हें किष्किंधा का राजसिंहासन दिलवाऊँगा । तुम्हारी पत्नी भी तुम्हें वापस मिलेगी ।

‘इसके लिए राम ने योजना बनाई सुग्रीव जा कर वालि को युद्ध के लिए ललकारेगा । वालि तुरंत युद्ध करने आएगा । वालि – सुग्रीव का युद्ध होगा इसी बीच राम का तीर वालि को लगेगा ।

योजना के अनुसार सुग्रीव ने वालि को ललकारा : ‘ हे वालि … बाहर निकल … मुझसे युद्ध कर … ‘ यह सुन कर वालि तुरंत बाहर आया । युद्ध शुरू हुआ । सुग्रीव वालि के प्रहारों से मृतप्राय हो गया ।

सुग्रीव प्रतीक्षा करता रहा राम तीर क्यों नहीं छोड़ते ? वालि का वध क्यों नहीं करते ?परंतु भ्रम में पड़ जाते , दोनों में से तीर किसे मारना है ? दोनों भाइयों का चेहरा – मोहरा , रूप – रंग , कद तीर निकालते , उसे धनुष पर भी चढ़ाते , राम तरकश सब कुछ एक जैसा ।

कुछ तभी वालि ने विचार किया भी हो , सुग्रीव मेरा भाई है अब इसको और मारूँगा तो बेचारा मर जाएगा । उसने सुग्रीव को जीवन – दान दे दिया । सुग्रीव ने राम से पूछा : ‘ आपने तीर क्यों नहीं चलाया ? वालि का वध क्यों नहीं किया ? ‘ राम ने इसका कारण बताया और बाद में उपाय भी बताया : ‘ हे लक्ष्मण , कल तुम फूलों का हार सुग्रीव को पहनाओगे और सुग्रीव फिर से वालि के साथ युद्ध करेगा । इससे मुझे पता चल जाएगा कि सुग्रीव कौन है और वालि कौन है ।

‘ सुग्रीव फिर वालि के दरवाजे पर पहुंचा और बोला : ‘ वालि , बाहर निकल … मेरे साथ युद्ध कर । वालि और सुग्रीव के बीच फिर युद्ध शुरू हुआ । राम वृक्ष के पीछे छिप कर खड़े थे । मौका देख कर उन्होंने वालि पर तीर छोड़ा सनननन … तीर वालि को लगा । विशाल वृक्ष की तरह वालि ढेर हो गया ।

उसकी अंतिम साँस चल रही थी । वालि ने राम से कहा : ‘ चोर की तरह मुझे मारना आपको शोभा नहीं देता । खेर , जो होना था वह हो गया … ‘ सुग्रीव किसी अपराधी की भाँति मुँह लटकाए दूर खड़ा था । वह सोच रहा था : ‘ वालि का संहार नहीं होना चाहिए था ।

‘वालि ने सुग्रीव को अपने पास बुलाया राज्य से निकाल दिया , यह ठीक नहीं किया … ‘ वह गहरी साँस लेते हुए बोला : क्रोध के आवेश में आ कर मैंने तुम्हें बालि का अंतिम समय आ गया था । और कहा : ‘ हे भाई सुग्रीव , ‘ हे राम , मैं आपका कोई दोष नहीं देखता । अब सुग्रीव को राज्य सौंपें और आप तथा सुग्रीव मेरे पुत्र अंगद का ध्यान रखें ।

और वालि वीरोचित मृत्यु को प्राप्त हुआ । अंतिम समय में उसने न सुग्रीव को दोष दिया और न राम को ही कोई दोष दिया । इस प्रकार वालि ने वैर को समाप्त किया और अंत में प्रेम की विजय हुई ।

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RELETED MORAL STORY HINDI CLASS  7,  8 , 9 , 10

Akbar Birbal ki sachi kahani in Hindi : Story in Hindi with moral for class 10

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