पवनपुत्र हनुमान || Best Motivational Moral Stories For Kids 2020 in Hindi ||

पवनपुत्र हनुमान || Best Motivational Moral Stories For Kids 2020 in Hindi ||

    Motivational Moral Stories for Kids :- 1

नमस्कार दोस्तों आज मै आपके बच्चो के लिए बहोत ही बढ़िया Motivational Moral Stories For Kids लिखी है 

पवनपुत्र हनुमान Best Motivational Moral Stories in Hindi For Kids


पवनपुत्र हनुमान || Best Motivational Moral Stories For Kids 2020 in Hindi ||
पवनपुत्र हनुमान || Best Motivational Moral Stories For Kids 2020 in Hindi ||

एक थी देव कन्या । उसका नाम था अंजनी । एक बार यह देव कन्या पहाड़ों में घूम रही थी । वृक्ष महक रहे थे । डाल – डाल पर वसंत खिला हुआ था । देव कन्या अंजनी का नाजुक व सुंदर हाथ झुकी हुई डाल से फूल चुनने के लिए आगे बढ़ा तभी पवन देवता की नजर अंजनी पर पड़ी । पवन देवता स्तब्ध रह गए । अंजनी की सुंदरता पवन देवता की आँखों में समा गई ।

पवन देवता ने अंजनी को बाहों में भर लिया । देव कन्या गुस्से से लाल हो उठी । पवन देवता ने कहा : ‘ क्रोध न करो । मेरे कोमल स्पर्श से तुम्हारा शरीर तनिक भी अपवित्र नहीं हुआ है । हृदय की उमंग के कारण स्पर्श हो गया है । हमारे इस दिव्य प्रेम के परिणाम स्वरूप तुम्हें एक पुत्र होगा । संसार में कोई उसकी बराबरी न कर सके ऐसा बलवान , बुद्धिमान और कीर्तिशाली होगा । ‘ इसके बाद अंजनी को पुत्र हुआ । उनका नाम हनुमान पड़ा ।

इस प्रकार हनुमान तो थे पवन के पुत्र ! इसलिए उन्हें जहाँ जाना हो , वहाँ उड़ कर तुरंत जा सकते थे ! , कितना मजा था ! न छोटी – छोटी गुदड़ियों में पड़े रहना । न घुटनों के बल चलने सीखना । न डगमगाते हुए एक – एक कदम चलना । जहाँ भी जाने का मन हो तुरंत उड़ना … और गति भी पवन जितनी तेज ! पहुँचते जरा भी देर न लगे । एक बार नन्हे – मुन्ने हनुमान से उनकी माँ ने कहा : ‘ तुम यहाँ खेलो , मैं अभी तुम्हारे लिए सेब ले कर आती हूँ … ‘

नन्हे – मुन्ने हनुमान आँगन में खेल रहे थे और आकाश में उड़ते हुए पक्षियों को देख रहे थे । तभी उनकी नजर पड़ी लाल – लाल सूर्य पर । यह देख कर हनुमान ने सोचा , आकाश में यह लाल – लाल सेब उगा हुआ लगता है … कितना सुंदर और पका हुआ है … ! कैसा मजेदार गोलमटोल ! लाल – लाल ! माँ जाने कब आएगी ? और सेब कब लाएगी ? भूख तो जोर से लगी है । चलो , अब हम उड़ते हैं आकाश में ऊँचे पहुँचते हैं और लाल – लाल सेब तोड़ कर खाते हैं …. यह विचार आते ही नन्हे – मुन्ने हनुमान उड़े … वे सूर्य के नजदीक , और नजदीक जाने लगे

यह देख कर सभी देवता घबरा उठे … सूर्य नहीं रहेगा तो दुनिया चलेगी कैसे ? रात – दिन कहाँ से होंगे ? इसलिए देवताओं के राजा इंद्र ने नन्हे – मुन्ने हनुमान पर वज्र से प्रहार किया- ‘ सटाक् ‘ हनुमान घायल हो गए और एक पहाड़ पर गिरे । उनकी दाढ़ी शिखर के साथ जोर से टकराई और खून से रंग गई । दाढ़ी को संस्कृत भाषा में ‘ हनु ‘ कहते हैं इससे उनका नाम ‘ हनुमान ‘ पड़ा । अपने नन्हे – से पुत्र को घायल हुआ देख कर पवन देवता को बहुत क्रोध आया । पवन देवता ने अपनी गति रोक दी । संपूर्ण जीवसृष्टि की साँस सँधने लगी । अब क्या हो ? सभी देवता घबरा गए । अंत में इंद्र देवता और ब्रह्माजी ने एक उपाय किया ।

उन्होंने हनुमान को वरदान दिया कि उन्हें कोई मार नहीं सकेगा । हनुमान स्वयं यदि चाहें , तभी उनकी मृत्यु हो । इस प्रकार हनुमान को अमरत्व का वरदान प्राप्त हुआ । लेकिन साथ – ही – साथ हनुमान सूर्य को फल समझ कर तोड़ने के लिए जाने जैसा कोई साहस दोबारा न करें , इसके लिए शर्त भी रखी अपने अंदर जो शक्तियाँ हैं , उन्हें हनुमान भूल जाएँगे । परंतु आवश्यकता पड़ने पर यदि कोई हनुमान को उनकी अद्भुत शक्तियों की याद दिलाएगा तो उसके बाद उनकी शक्तियाँ फिर जागृत हो जाएंगी । इसके बाद हनुमान की ऐसी शरारतें बंद हो गई जिससे किसी को नुकसान हो और हनुमान शांत – समझदार हो गए ।


Motivational Moral Stories for Kids :- 2

Motivational Moral Stories for Kids
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Best Motivational Moral Stories in Hindi For Kids सीताजी की खोज में हनुमान

सीताजी की खोज में हनुमान रावण ने सीताजी का अपहरण किया उसके बाद राम और सुग्रीव ने सीताजी की खोज के लिए सभी दिशाओं में सैनिक भेजे । हनुमान अंगद , जांबुवान तथा वानर सेना को ले कर दक्षिण दिशा में गए । दक्षिण दिशा में सीताजी को खोजते – खोजते वे आगे – ही – आगे बढ़ते गए । अंत में समुद्र आया । अब ? सीताजी का पता लगाए बिना वापस तो जा नहीं सकते थे । अब क्या करें ? सब लोग एकदम निराश हो गए ।

एक ऊँची पहाड़ी पर बैठा हुआ एक बूढ़ा गिद्ध मृत्यु हुई थी । यह सब देख – सुन रहा था । उसके पंख नहीं थे । इसलिए वह उड़ नहीं सकता था । पर उसकी आँखें दूर – दूर तक देख सकती थीं । इस गिद्ध का नाम संपाति था । यह जटायु का भाई था । रावण सीता को उठा ले गया , तब रावण के साथ लड़ते – लड़ते जटायु की इसलिए संपाति ने विचार किया , रावण सीता को और तो कहाँ ले जाएगा ? सीता लंका में ही होगी । संपाति ने आँख संकुचित की और दू … र लंका में देखा । विभिन्न स्थलों पर घूमती – घूमती – घूमती उसकी नजर अंत में अशोक वाटिका पर पड़ी । वहाँ उसने सीता माता को देखा , वे शोक में डूबी हुई थीं ।

संपाति ने हनुमान को यह जानकारी दी इससे सब प्रसन्न हो उठे । पर अब यह सवाल उठा इतना बड़ा समुद्र पार कैसे किया जाए ? हनुमान में यह शक्ति थी । पर ब्रह्माजी की शर्त के कारण हनुमान तो अपनी शक्तियों के बारे में भूल ही चुके थे । वे उदास हो कर बैठे थे … तभी जांबुवान ने याद दिलाया : ‘ हे हनुमान , तुममें दिव्य शक्ति है । अपनी शक्ति का स्मरण करो , अपना कद बढ़ाओ , इसके बाद छलाँग लगाओ और तीर की गति से उड़ना शुरू कर दो । समुद्र को पार कर लो और ले आओ सीताजी की खोज – खबर … ‘

यह सुनते ही हनुमान की दिव्य शक्तियाँ जागृत हो उठीं । और हनुमान का आकार होने लगा , पेड़ जितना , बड़ा , और बड़ा पहाड़ जितना … ! विशाल कद धारण करने के बाद हनुमान ने गर्जना की : ” जय श्री रा … म … ‘ और इसके बाद लगाई छलाँग । आधे समुद्र तक तो इसी प्रकार पहुँच गए हनुमान … इसके बाद वे उड़ने लगे … और देखते – ही – देखते वे पहुंच गए लंका में । पर सभी काम बल से नहीं होते । कुछ काम कल ( युक्ति ) से होते हैं । अतः हनुमान ने तुरंत नन्हे वानर का रूप धारण कर लिया और दीवार फांद कर नगर में प्रवेश किया ।

इसके बाद महालयों , आवासों , राजमहलों , रनिवासों , गलियों , नगर रचना , शस्त्रागारों …. सभी को हनुमान ने बारीकी से देख लिया । यह सोच कर कि युद्ध के समय यह सब उपयोगी होगा । लेकिन सीताजी कहीं दिखाई नहीं दीं । अंत में नन्हे वानर के रूप में हनुमान अनेक बाग – बगीचों में घूमते – घूमते अशोक वाटिका में आ पहुंचे । वह घनी पत्तियों वाले एक पेड़ की डाल पर बैठ कर चारों ओर देखने लगे विचित्र चेहरे वाली राक्षसियाँ पहरा दे रही थीं और थोड़ी – थोड़ी देर बाद डरावनी हँसी हँस रही थीं । तभी हनुमान ने आवाज सुनी : ‘ हे राम … हे राम … हे राम … ‘ वे जिस पेड़ पर बैठे थे , उस पेड़ के नीचे से ही यह मधुर आवाज आ रही थी । पर नीचे कोई दिखाई नहीं दे रहा था ।

हनुमान ने डाल – पत्ते हटा कर देखा तो सीताजी दिखाई दीं ! उनकी प्रत्येक साँस से आवाज आ रही थी : ‘ हे रा … म … हे रा … म … हे रा … म … ‘ नन्हे वानर के रूप में हनुमान तो कूद कर सीता माता के सामने खड़े हो गए , दोनों हाथ जोड़ कर सिर नवा कर … भक्तिभाव से बोले : ‘ हे सीता माता , मैं हनुमान हूँ । राम का दूत …। ‘ सीता बिना कुछ बोले , नन्हे वानर को देखती रहीं । सीता ने पहले तो सोचा , कोई राक्षस वानर के रूप में आया है क्या ? पर बाद में सीता को हनुमान की आँखों में शुद्ध भक्ति दिखाई दी ।

हनुमान बुद्धिमान थे । उन्होंने सोचा , सीता माता को किस तरह विश्वास हो कि मैं राम का ही दूत हूँ … हनुमान ने तुरंत साथ में लाई हुई रामचंद्र की अंगूठी सीताजी के हाथ में रख दी । सीता माता की आँखों में उमड़ आए आँसू देख कर हनुमान तुरंत बोल उठे : ‘ माता , आप कहें तो अभी आपको अपनी पीठ पर बिठा कर समुद्र पार करा दूं … और श्रीराम के पास ले चलूँ … ‘ सीता ने आँसू पोंछ कर कहा , ‘ पुत्र , तुम्हारी शक्ति में मुझे पूरा विश्वास है । पर इस प्रकार गुपचुप जाने में मेरे पति की वीरता का पता कैसे चलेगा ? रावण का सर्वनाश कैसे होगा ? ‘

हनुमान ने कहा : ‘ सीता माता , आप जरा भी चिंता न करें । मैं शीघ्र ही जा कर राम को समाचार देता हूँ और तुरंत राम लक्ष्मण , सुग्रीव व वानर सेना को ले कर आये ही समझिए … और रावण तथा सभी राक्षस मरे ही समझिए … तो माता , अब मैं विदा लूँ … ‘ यह कह कर हनुमान ने घुटनों के बल बैठ कर दोनों हाथ जोड़ कर सिर झुका कर सीता माता को प्रणाम किया । सीता माता ने आशीर्वाद दिया । और नन्हे वानर रूप हनुमान एक छलाँग में पेड़ पर चढ़े और दूसरी छलाँग में लंका नगरी की स्वर्ण दीवार पर पहुंचे ।


Motivational Kids Moral Stories :- 3

Motivational Moral Stories for Kids :- 3
Motivational Moral Stories for Kids :- 3

Best Motivational Moral Stories in Hindi For Kids लंका दहन करते हुए वीर हनुमान

लंका दहन करते हुए वीर हनुमान लंका नगरी की दीवार पर बैठे – बैठे हनुमान ने सोचा , सीताजी का पता तो लगा लिया । अब चुपचाप लौट जाऊँ तो इसमें मेरी वीरता क्या ? रावण को कुछ तो पराक्रम दिखाना चाहिए … रावण को भी अंदर – ही – अंदर काँप उठना चाहिए । हनुमान ने तुरंत अपना कद बढ़ाया । विराट रूप धारण किया । प्रवेश द्वार के ऊँचे खंभे पर चढ़ कर उन्होंने गर्जना की : ‘ जय … श्री … रा … म … ‘

प्रचंड गर्जना से वृक्ष काँप उठे । आवास हिल उठे । कुछ राक्षस भागने लगे । कुछ राक्षस हनुमान को मारने दौड़े । पर हनुमान ने सभी राक्षसों को कुचल डाला । यह समाचार मिलते ही रावण ने अपने शूरवीर सेनापति को भारी सेना के साथ भेजा । दूसरी ओर हनुमान पत्थर की बड़ी – बड़ी शिलाएँ और चट्टानें उठा – उठा कर राक्षस – सेना पर फेंकने लगे । राक्षस – योद्धाओं का संहार करने लगे । हनुमान को पकड़ने के लिए रावण ने अपने महा पराक्रमी पुत्र अक्ष को भेजा । अक्ष भी वीरतापूर्वक लड़ता हुआ मारा गया । अंत में रावण ने इंद्र को जीतने वाले अपने पुत्र इंद्रजित को भेजा ।

हनुमान और इंद्रजित का युद्ध काफी समय तक चला । अंत में इंद्रजित ने ब्रह्मास्त्र छोड़ा । जो हनुमान को थोड़ी देर तक बाँध कर रख सकता था । ब्रह्मास्त्र की शरण में गए बिना छुटकारा नहीं था । इसलिए हनुमान धरती पर गिर पड़े । राक्षस हर्षध्वनि करने लगे । लंबे रस्से से हनुमान को कस कर बाँधा । इसके बाद वे उन्हें ले गए रावण के दरबार में । हनुमान ने रावण से साफ – साफ कहा : ‘ मैं राम का दूत हूँ । मेरा नाम हनुमान है । सीता माता को राम के पास भेज दें । उनसे क्षमा – याचना करें । दयालु राम आपको क्षमा कर देंगे । नहीं तो लंका का और आपका विनाश निश्चित है … ‘

हनुमान ने अपना सच्चा परिचय दिया फिर भी रावण ने उन्हें बंधनमुक्त करने के लिए नहीं कहा । न ही उन्हें बैठने के लिए आसन दिया । अतः हनुमान को आया गुस्सा । फिर ब्रह्मास्त्र का समय भी पूरा हो चुका था । हनुमान ने पलक झपकते ही अपने बंधन तोड़ डाले । वे अपनी पूँछ को बढ़ाते गए … बढ़ाते गए … पूँछ को गोलाकार करते हुए हनुमान ने रावण के सिंहासन से भी ऊँचा पूँछ का आसन बनाया । फिर हनुमान कूद कर उस आसन पर विराजमान हो गए । यह देख कर गुस्से से रावण की आँखें फैल गईं । उसका चेहरा लाल हो गया और वह जोर से चिल्लाया : ‘ इस बंदर की पूँछ पर चिथड़े बाँधो । उस पर तेल उडेलो । फिर उसमें आग लगा दो और जला दो इसकी पूँछ । ‘

हनुमान आराम से बैठे रहे । पूँछ में आग लगने दी । फिर लगाई छलाँग । इसके बाद तो यहाँ से वहाँ और वहाँ से दूसरी जगह वे उछल – कूद करने लगे … रावण के दरबार में और राजमहल में खिड़कियों के परदे , गलीचे और … सब कुछ धू – धू कर जलने लगा … हनुमान तो छलाँग लगाते हुए पहुंचते दूसरे महल में … कुछ क्षणों के बाद उस महल में भी लपटें उठती हुई दिखाई देतीं । इस प्रकार हनुमान अनेक महलों और आवासों में घूमते रहे । संपूर्ण लंका में जहाँ देखो वहाँ आग की लपटें … आग ही आग … ‘

इस प्रकार पूरी लंका में आग लगाने के बाद हनुमान ने एक जोरदार छलाँग लगाई तो पहुँचे सीधे समुद्र के किनारे । वहाँ हनुमान ने अपनी पूँछ बुझाई … और समुद्र लाँघ कर वापस लौट आए । अंगद , जांबुवान तथा सारी वानर सेना प्रसन्न हो उठी … दौड़ते , उछलते , कूदते हुए … सभी पहुँचे राम के पास । अंगद ने राम से सीता माता का पता लग जाने तथा हनुमान के पराक्रम की बात कही । सीता की खबर मिलने से राम बहुत प्रसन्न हो गए । पहले तो वे रो पड़े फिर उन्होंने वीर हनुमान को गले लगा लिया । इसके बाद तो राम – लक्ष्मण – सुग्रीव – हनुमान – अंगद तथा अनेक योद्धा वानर सेना के साथ चल पड़े लंका पर आक्रमण करने , रावण और उसकी लंका को नष्ट करने , सीताजी को मुक्त करवाने 

लंका की लड़ाई में भी हनुमान ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई । उन्होंने अनगिनत योद्धाओं का संहार किया , इसके अलावा उन्होंने ऐसा कठिन काम चुटकी बजाते हुए कर दिखाया , जिसे हनुमान के सिवा कोई भी नहीं कर सकता था । इंद्रजित ने राम – लक्ष्मण पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया । लक्ष्मण बेहोश हो कर गिर पड़े । जांबुवान , हनुमान , अंगद सभी घायल हो चुके थे । हिमालय से यदि औषधि लाने में देर लगती और बेहोश लक्ष्मण की कहीं मृत्यु हो जाती तो ? जांबुवान ने हनुमान से कहा : ‘ यह काम ऐसा है , जिसे केवल तुम्हीं कर सकते हो । झटपट हिमालय जाओ । वहाँ कैलास तथा ऋषभ पर्वत के बीच द्रोणाचल नाम की एक पहाड़ी है । वहाँ से मृतसंजीवनी नाम की औषधि ले आओ । ‘ घायल होने के बावजूद हनुमान तुरंत उड़े और झटपट पहुँचे हिमालय पर ।

द्रोणाचल पहाड़ी तो तुरंत मिल गई । पर अनेक वनस्पतियों एवं औषधियों में से मृतसंजीवनी को कैसे ढूँढ़ निकालें ? हनुमान ने सोचा , मृतसंजीवनी को ढूँढ़ने में समय नष्ट करने के बजाय पूरी पहाड़ी ही उठा कर क्यों न ले चलूँ … हनुमान तुरंत हथेली पर पहाड़ी उठा कर उड़े । कुछ देर में ही वे उत्तर में हिमालय से एकदम दक्षिण में लंका आ पहुंचे । संजीवनी औषधि के कारण लक्ष्मण थोड़ी ही देर में पहले की ही तरह भले – चंगे हो गए । यह देख कर पूरी सेना में नई शक्ति का संचार हुआ । रावण मारा गया । लंका का सर्वनाश हो गया । युद्ध में राम की , धर्म की विजय हुई । इसके बाद हनुमान हमेशा रामभक्त बन कर रहे । हनुमान जैसा रामभक्त कोई नहीं हुआ , और होगा भी नहीं । इसीलिए तो राम – लक्ष्मण – सीता के साथ ही हनुमान की भी लोग पूजा करते हैं और कहते हैं राम – लक्ष्मण … जानकी … जय बोलो हनुमान की …

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